//पहली मुलाकात – A Poetry by Priyesh Suthar

पहली मुलाकात – A Poetry by Priyesh Suthar

मिला में तुझसे कैसे, ये बात नही पुरानी है,
हो गया मै कैसे पूरा, ये बात तुझे बतानी है,

मिलना तो पक्का था हमारा, बस वक़्त आना बाकि था,
सोचा ना था हमने भी,की बारिश का आना भी बाकि था

बारिश का ‘किरदार’ जब शुरू हुआ, तो रुक गए ये दिल
सोचा लिया हमने मन में, की आज ना पाएंगे मिल,

बेचैन में भी था थोडा, बेचैन तू भी थी थोड़ी,
बस अब मिलने की बात हमने, भगवान पे ही छोड़ी,

इंतजार था उस पल का , जब बारिश थम जाएँगी,
हमारी दोस्ती को और बढ़ाने , तू मुझसे मिलने आएँगी,

रुकना तो था बारिश को , पर देर लगादि थोड़ी,
तुझसे मिलकर मेने आज ,अपनी चुप्पी तोड़ी,

वैसे तो में ना बताऊ , अपनी बात आसानी से ,
तूने सब कुछ जान लिया, सब कुछ मेरी जुबानी से,

थोडा था वक़्त मेरे पास , तुझसे कैसे मेरा हाल कहु,
कहना तो बहुत कुछ था , सोचा थोड़ी देर और साथ रहू,

इन्ही यादो को समेंटे में, जा रहा हु में दूर तुझसे,
बस वादा करदे इतना , दोस्ती ना तोडना मुझसे,

कहते थे कुछ लोग मुझे,तुझमे है वो बात कहाँ
पगले!तेरी किस्मत में,कभी किसी का साथ कहाँ

पर अब होते हैरान वो,जब देखे तेरे साथ मुझे,
अब एक इजाजत और बक्श,जो दिल का हाल सुनाउं तुझे

About the Author:

Name: Priyesh Suthar

His writing is based upon the the real events happens around him or with him.

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